एजेंसी | चंडीगढ़/नई दिल्ली
पंजाब में चीनी की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं और मिठाई कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के बाजारों में पिछले करीब 10 दिनों में चीनी के दाम लगभग 20 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। इससे घरेलू बजट पर असर पड़ने के साथ आगामी त्योहारों में मिठाइयों के महंगे होने की आशंका बढ़ गई है।
पंजाब के कुछ बाजारों में चीनी की कीमत 60 रुपये किलो के आसपास पहुंच गई है। हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में भी चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 20 जुलाई को 48.18 रुपये प्रति किलो थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो हो गई। कुछ स्थानीय बाजारों में यह भाव 65 रुपये किलो तक पहुंच गया है। सरकार ने कीमतों में इस तेजी के बीच 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। करीब एक दशक बाद भारत को घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए चीनी आयात करने का फैसला करना पड़ा है।
चीनी की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण इस वर्ष उत्पादन में कमी को माना जा रहा है। सरकार के अनुमान के अनुसार 2025-26 चीनी सत्र में उत्पादन करीब 306 लाख टन रह सकता है। शुरुआती अनुमान करीब 343 लाख टन का था। यानी अनुमान की तुलना में उत्पादन में लगभग 37 लाख टन की कमी का अंदेशा है।
मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और गन्ने की पैदावार पर पड़े असर को उत्पादन घटने की प्रमुख वजह बताया जा रहा है। इसके अलावा शुरुआती स्टॉक भी पिछले वर्ष की तुलना में कम है। ऐसे में त्योहारी मौसम से पहले मांग बढ़ने पर बाजार में कीमतों पर दबाव और बढ़ गया है।
केंद्र सरकार का यह भी कहना है कि इथेनॉल कार्यक्रम से चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई और किसानों को गन्ने का भुगतान करने में मदद मिली। इसलिए इथेनॉल नीति को पूरी तरह कीमत बढ़ने के लिए जिम्मेदार ठहराना
उचित नहीं है।
हालांकि, अक्टूबर में नई चीनी की उपलब्धता और केंद्र के आयात फैसले के प्रभाव के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत कब मिलती है।
इथेनॉल पर अलग-अलग दावे
चीनी महंगी होने के पीछे इथेनॉल उत्पादन को लेकर भी बहस तेज है। आलोचकों का कहना है कि गन्ने और चीनी का एक हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में जाने से बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हालांकि, केंद्र सरकार का कहना है कि इस वर्ष इथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल पिछले वर्षों की तुलना में कम रहा है और मौजूदा तेजी को केवल इथेनॉल से जोड़ना सही नहीं होगा। सरकार के अनुसार खराब मौसम, कम उत्पादन और बाजार में जमाखोरी कीमत बढ़ने के प्रमुख कारण हैं।
केंद्र ने कहा इथेनॉल नहीं जमाखोरी से
केंद्र ने चीनी की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कारोबारियों पर स्टॉक सीमा लागू की है। कुछ कारोबारियों और बिचौलियों द्वारा जरूरत से ज्यादा चीनी रोककर रखने से बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बना। इसी को देखते हुए स्टॉक सीमा और निगरानी व्यवस्था कड़ी की गई है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने के लिए चीनी के निर्यात पर नियंत्रण जारी रहेगा। साथ ही 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात करने का फैसला किया गया है।
अक्टूबर में राहत की उम्मीद
केंद्र सरकार और चीनी उद्योग दोनों की नजर अब नए पेराई सत्र पर है। मिलों को सामान्य समय से पहले उत्पादन शुरू करने की तैयारी करने को कहा गया है। चीनी उद्योग का मानना है कि यदि पेराई जल्द शुरू होती है और आयातित चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है तो कीमतों में तेजी पर रोक लग सकती है। फिलहाल पंजाब में तेजी से बढ़े दाम का सीधा असर मिठाई कारोबार पर पड़ रहा है। त्योहारों में चीनी की मांग बढ़ने के कारण कारोबारियों को लागत बढ़ने की चिंता है।