यमुनानगर | इस साल दशहरा पर्व को लेकर यमुनानगर में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। शहरवासियों को 75 फुट ऊंचा रावण दहन देखने का मौका मिलेगा। इसके साथ ही मेघनाथ और कुंभकरण के 65 फुट ऊंचे पुतले भी तैयार किए गए हैं। विशाल पुतलों को देखने के लिए लोगों में भारी उत्सुकता है।
करीब 40 दिनों से कारीगर इन पुतलों को बनाने में जुटे थे। दिन-रात मेहनत के बाद अब पुतले अंतिम रूप ले चुके हैं। रावण को सजाने-संवारने का काम जोर-शोर से किया जा रहा है और कारीगर अंतिम टच देकर इन्हें मैदान में स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। पुतलों की सजावट के लिए सहारनपुर से विशेष कागज और कपड़ा मंगवाया गया है, जिससे ये और आकर्षक दिखाई दे रहे हैं। रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों को बनाने में 4 लाख रुपये से अधिक की लागत आई है।
कारीगर महिंदर मनचंदा ने बताया कि उनका परिवार पिछले 40 सालों से दशानन, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले बनाने का पुश्तैनी काम कर रहा है। विधि-विधान से पुतले तैयार किए जाते हैं, उनकी पूजा की जाती है, और ढोल के साथ इन्हें मैदान तक ले जाकर दहन किया जाता है। इस बार इन पुतलों में करीब 2 लाख रुपये की आतिशबाजी भी लगाई गई है।
दशहरा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने असत्य और अहंकार के प्रतीक रावण का वध किया था। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए हर साल पुतले दहन कर समाज को संदेश दिया जाता है कि चाहे बुराई कितनी भी बड़ी हो, अंत में अच्छाई ही जीतती है।
इस बार यमुनानगर में दशहरे का उत्सव और भी खास रहेगा। विशाल पुतलों के दहन के साथ रंगीन आतिशबाजी और रोशनी पूरे मैदान को जगमगा देंगे। हजारों लोग इस दृश्य का साक्षी बनेंगे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई उत्साह से इस पर्व का आनंद लेने के लिए तैयार है।