नवा रायपुर | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत विश्व शांति के मिशन में अपनी भूमिका पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया में कहीं भी संकट या आपदा आती है, तो भारत एक भरोसेमंद साथी के रूप में तुरंत मदद के लिए आगे आता है। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को नवा रायपुर में ब्रह्माकुमारी संस्थान के नवनिर्मित ‘शांति शिखर रिट्रीट सेंटर – एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विचारों के साथ-साथ व्यावहारिक नीतियां और ठोस प्रयास भी वैश्विक शांति के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा, “भारत आज इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। चाहे आपदा राहत हो या मानवीय सहायता, भारत हर जगह भरोसे के प्रतीक के रूप में पहुंचता है।”
मोदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी भारत पूरी दुनिया की आवाज बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन ही सुरक्षित भविष्य की कुंजी है। “हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि नदियां हमारी मां हैं, जल देवता है और पेड़ों में ईश्वर का वास है। जब हम प्रकृति के साथ मिलकर जीना सीखेंगे, तभी धरती का भविष्य सुरक्षित रहेगा,” उन्होंने कहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’ और ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ जैसी पहल भारत की विश्व कल्याण की सोच को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि ‘मिशन लाइफ’ के जरिए भारत ने मानवता के लिए एक नया वैश्विक अभियान शुरू किया है।
मोदी ने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान समाज को आध्यात्मिक और नैतिक रूप से सशक्त करने में अहम भूमिका निभा रहा है। “शांति शिखर जैसे संस्थान भारत के प्रयासों को नई ऊर्जा देंगे और विश्व शांति के संदेश को करोड़ों लोगों तक पहुंचाएंगे,” उन्होंने कहा।
प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड के स्थापना दिवस पर नागरिकों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “राज्य का विकास ही देश के विकास की नींव है। विकसित भारत के निर्माण में सभी राज्यों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।”
मोदी ने कहा कि भारतीय सभ्यता का मूल मंत्र ‘विश्व कल्याण’ है। उन्होंने कहा कि हर धार्मिक अनुष्ठान में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना हमारे संस्कारों की पहचान है।
कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, ब्रह्माकुमारी संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी जयंती दीदी और अतिरिक्त महासचिव डॉ. राजयोगी बीके मृत्युंजय भाई भी उपस्थित रहे।