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देहदान से संवर रहा डॉक्टरों का भविष्य: नेरचौक मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रदीप कश्यप की अनूठी पहल


देहदान से संवर रहा डॉक्टरों का भविष्य: नेरचौक मेडिकल कॉलेज के डॉ. प्रदीप कश्यप की अनूठी पहल

Mandi, Dharamveer 

जब कोई व्यक्ति इस दुनिया से जाता है, तो उसका शरीर सामान्यतः जलाया या दफनाया जाता है। परंतु मेडिकल साइंस के लिए यही देह सबसे बड़ा शिक्षक बन जाती है। डॉक्टर बनने की राह में मृत शरीर पर किए गए अध्ययन से ही भविष्य के चिकित्सक मानव शरीर की जटिलताओं को समझ पाते हैं।

इसी उद्देश्य को जन-आंदोलन का रूप देने में जुटे हैं श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज, नेरचौक के एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रदीप कश्यप, जो अब तक 330 लोगों को देहदान के लिए प्रेरित कर चुके हैं। इनमें से 10 मृतदेह कॉलेज को अध्ययन हेतु प्राप्त हो चुके हैं।

बिना देहदान के डॉक्टर की पढ़ाई अधूरी — डॉ. प्रदीप कश्यप

डॉ. कश्यप का कहना है कि किताबें और डिजिटल संसाधन डॉक्टर को दिशा देते हैं, लेकिन अनुभव मृतदेह ही सिखाता है।उन्होंने बताया कि 10 मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण के लिए एक देह आवश्यक होती है, जबकि कॉलेज में हर वर्ष 120 छात्रों के लिए कम से कम 12 देहों की जरूरत पड़ती है।

परिजनों के इंकार से रुकता है यह पुण्य कार्य

डॉ. कश्यप ने बताया कि कई बार पंजीकरण के बावजूद परिजन मृत्यु के बाद देह सौंपने से इंकार कर देते हैं। अब तक ऐसे 8 से 10 मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं का हवाला देकर लोग अंतिम संस्कार कर देते हैं, जबकि हमारे शास्त्रों में भी देहदान को पुण्य कार्य बताया गया है।

अंगदान और देहदान — दोनों का अलग महत्व

डॉ. कश्यप ने स्पष्ट किया कि अंगदान और देहदान दो अलग प्रक्रियाए हैं।अंगदान से किसी को जीवनदान मिलता है, जबकि देहदान से वे डॉक्टर तैयार होते हैं जो आगे चलकर हज़ारों जिंदगियां बचाते हैं।उन्होंने यह भी बताया कि मेडिकल कॉलेज नेरचौक में फिलहाल अंगदान की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

स्वेच्छा से होती है देहदान की प्रक्रिया

देहदान पूरी तरह स्वैच्छिक प्रक्रिया है। इच्छुक व्यक्ति मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग में जाकर फॉर्म भर सकते हैं, जिस पर परिजनों के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। इसके बाद कॉलेज की ओर से देहदान कार्ड जारी किया जाता है। मृत्यु के बाद परिजन कॉलेज को सूचित कर देह सौंप देते हैं, जो अध्ययन एवं शोध कार्यों में उपयोग होती है।

डॉ. प्रदीप कश्यप का संदेश

देहदान केवल वैज्ञानिक योगदान नहीं, बल्कि मानवता की सेवा है। आपकी देह मृत्यु के बाद भी किसी का भविष्य गढ़ सकती है — यही सच्चा जीवन है।”

Chandrika

chandrika@summerexpress.in

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