नई दिल्ली। बिहार में महागठबंधन की करारी हार से कांग्रेस को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, लेकिन इसी बीच राजस्थान से पार्टी के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अंता विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने महत्वपूर्ण जीत दर्ज की है, जिसने प्रदेश की राजनीति में नया उत्साह भर दिया है।
कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद जैन ‘भाया’ ने बड़ी बढ़त के साथ जीत हासिल करते हुए कुल 69,571 वोट प्राप्त किए। उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार मोरपाल सुमन को 15,612 वोटों के अंतर से मात दी। उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ने 53,800 वोट हासिल किए और तीसरे स्थान पर रहे।
अंता सीट पर कुल 20 राउंड की काउंटिंग के बाद आधिकारिक नतीजे घोषित किए गए। उपचुनाव में इस बार रिकॉर्डतोड़ मतदान देखने को मिला था। 11 नवंबर को वोटिंग के दौरान 80% से अधिक मतदाताओं ने अपने मत का प्रयोग किया, जो सीट की राजनीतिक अहमियत को दर्शाता है।
बीजेपी को बड़ा झटका, वसुंधरा राजे की पकड़ पर सवाल
अंता सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ मानी जाती रही है। मोरपाल सुमन को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का करीबी माना जाता है। ऐसे में इस सीट पर बीजेपी की हार सीधे-सीधे राजे की राजनीतिक मजबूत पकड़ पर सवाल खड़े करती है। 2023 के विधानसभा चुनाव में यह सीट भाजपा के नाम रही थी, जब कंवरलाल मीणा ने भारी मतों से जीत दर्ज की थी।
क्यों हुआ उपचुनाव?
1 मई 2025 को अंता सीट खाली घोषित हुई थी। कंवरलाल मीणा को 2005 में एसडीएम पर हथियार तानने के मामले में कोर्ट से तीन साल की सजा सुनाई गई थी। सजा तय होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई, जिसके चलते उपचुनाव कराना अनिवार्य हो गया।
कांग्रेस की इस जीत को बिहार में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के बीच एक महत्वपूर्ण मनोबल-वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रमोद जैन ‘भाया’ ने सोशल मीडिया पर जनता का आभार जताते हुए इसे लोकतंत्र और जनता की जीत बताया।