Dharamshala, Rahul
गद्दी समुदाय की लंबित मांगों को लेकर 23 वर्षों से संघर्ष जारी है, लेकिन अब समुदाय का सब्र जवाब देता दिखाई दे रहा है। हिमालयन गद्दी यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीतकालीन सत्र से पहले सरकार उनके प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए नहीं बुलाती, तो वे तपोवन में विधानसभा का घेराव करेंगे। यूनियन का कहना है कि अब आंदोलन उग्र रूप ले सकता है और धरना-प्रदर्शन से लेकर गिरफ्तारियां देने तक समुदाय पीछे नहीं हटेगा।
सोमवार को धर्मशाला में आयोजित प्रेसवार्ता में हिमालयन गद्दी यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष मोहिंद्र सिंह ने बताया कि गद्दी समुदाय की 13 उपजातियां हैं, जिनमें से छह—सिप्पी, हाली, धोगरी, वाड़ी, रिहाड़े और लाहौर—के भू-अभिलेखों में आज तक गद्दी शब्द नहीं जोड़ा गया है। उनके अनुसार कई सर्वेक्षणों और संस्थागत सिफारिशों में यह स्पष्ट कहा गया है कि इन उपजातियों को भी गद्दी समुदाय का हिस्सा मानते हुए अभिलेखों में संशोधन होना चाहिए। इसके बावजूद 23 वर्षों से यह मांग पूरी नहीं की गई है।
मोहिंद्र सिंह ने बताया कि सरकार तीन से पांच बार सर्वे करवा चुकी है, कई समितियां इस मुद्दे पर रिपोर्ट दे चुकी हैं, और विभिन्न संगठनों ने भी उपजातियों को गद्दी शब्द से जोड़ने की अनुशंसा की है। बावजूद इसके अब तक ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार से उनकी कई दौर की बातचीत हुई और तीन बार आश्वासन भी मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।उन्होंने राज्य सरकार को यह भी याद दिलाया कि कांगड़ा और चंबा सहित हिमाचल प्रदेश में करीब आठ लाख की गद्दी जनसंख्या निवास करती है, जिसका प्रभाव 15 से 16 विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। ऐसे में सरकार को समुदाय की इस मांग को गंभीरता से लेना चाहिए।
प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे पर जल्द समाधान निकालें और शीतकालीन सत्र से पहले गद्दी यूनियन के पदाधिकारियों से अवश्य मिलें। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सत्र से पहले बैठक नहीं होती और उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो गद्दी समुदाय तपोवन में विधानसभा का घेराव करेगा और बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।