ईरान | ईरान ने अमेरिका के साथ रिश्तों को लेकर अपने रुख में बड़ा बदलाव दिखाया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने विदेश मंत्री को वाशिंगटन के साथ “तर्कसंगत और न्यायसंगत” बातचीत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यह बयान अमेरिका से संवाद को लेकर तेहरान की ओर से अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। ऐसे समय में यह पहल सामने आई है, जब दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय तनाव को लेकर हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
मंगलवार को दिए गए बयान में राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा कि यदि बातचीत के लिए अनुकूल माहौल बनता है, जहां धमकियों और अव्यावहारिक शर्तों की कोई जगह न हो,तो ईरान गरिमा, विवेक और दूरदर्शिता के साथ बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला क्षेत्रीय मित्र देशों की अपील और कूटनीतिक प्रयासों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रुख बदलाव ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सहमति के बिना संभव नहीं था। इससे पहले खामेनेई अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत के सख्त खिलाफ रहे हैं। ऐसे में यह घटनाक्रम ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों में अहम बदलाव का संकेत देता है।
हाल के महीनों में ईरान के भीतर हुए व्यापक प्रदर्शनों और उन पर सरकार की सख्त कार्रवाई के बाद अमेरिका के साथ तनाव और गहरा गया था। राष्ट्रपति पेजेशकियान स्वयं कई बार यह स्वीकार कर चुके हैं कि देश की आंतरिक स्थिति चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। इसी पृष्ठभूमि में बातचीत की पहल को हालात संभालने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, किसी ठोस समझौते की राह अभी भी आसान नहीं मानी जा रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि किसी भी वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें होंगी। जून में इजराइल-ईरान के बीच हुए 12 दिवसीय संघर्ष के दौरान अमेरिका द्वारा ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर की गई बमबारी ने स्थिति को और जटिल बना दिया था।
फिलहाल अमेरिका की ओर से इस संभावित बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह पहल वास्तव में ईरान-अमेरिका संबंधों में नई शुरुआत साबित होगी या सिर्फ एक कूटनीतिक संकेत बनकर रह जाएगी।