Summer Express, वॉशिंगटन | ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस बीच दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई देशों से इस क्षेत्र में अपने युद्धपोत तैनात करने का आग्रह किया, लेकिन अब तक सहयोगी देशों की ओर से ठंडी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि वह सात देशों के साथ इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं। उनका कहना था कि यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन-से देश इस अपील का समर्थन करते हैं और कौन इससे दूरी बनाते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि जो देश इस समुद्री मार्ग से तेल आयात करते हैं, उन्हें इसकी सुरक्षा में भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की प्रमुख कड़ी माना जाता है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है। रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही इस रास्ते से होती है। इसके अलावा वैश्विक एलएनजी आपूर्ति का भी बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर है, जिससे भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ऊर्जा सुरक्षा जुड़ी हुई है।
हालांकि अमेरिका की अपील के बावजूद कई देशों ने इस मिशन में शामिल होने को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। जापान के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अभी तक कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं मिला है और फिलहाल सैन्य जहाज भेजने की योजना नहीं है। फ्रांस के रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि मौजूदा युद्ध की स्थिति में फ्रांस अपने युद्धपोत नहीं भेजेगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया और तुर्की ने भी इस पहल में शामिल होने से लगभग इनकार कर दिया है, जबकि जर्मनी ने इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए हैं। दक्षिण कोरिया ने भी इस विषय पर विचार करने की बात कही है।
इसी दौरान ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों के कारण ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार अब ईरान पहले की तुलना में बहुत कम ड्रोन और मिसाइलें इस्तेमाल कर पा रहा है। ट्रंप का कहना है कि ईरान की क्षमता कमजोर पड़ने के कारण होर्मुज क्षेत्र की निगरानी करना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।