Summer express, कपूरथला | मौसम में अचानक बदलाव और आने वाले दिनों में बारिश की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मंडियों और खेतों में खुले आसमान के नीचे रखा गेहूं अब खराब होने के खतरे में है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका सताने लगी है।
किसानों का कहना है कि कटाई के बाद अब तक उनकी पूरी फसल की खरीद और उठान नहीं हो पाई है। कई जगहों पर गेहूं खुले में ढेर के रूप में पड़ा हुआ है। ऐसे में यदि बारिश होती है, तो फसल के भीगने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाएगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, गेहूं के नमी के संपर्क में आने से उसमें फफूंदी लगने की संभावना बढ़ जाती है और उसका वजन भी कम हो सकता है। इससे बाजार में कीमत घट जाती है और सरकारी खरीद प्रक्रिया में भी दिक्कतें आती हैं।
किसानों ने बताया कि उन्होंने मेहनत और लागत लगाकर फसल तैयार की है, लेकिन अब मौसम की मार उनके सामने नई चुनौती बनकर खड़ी है। उनका कहना है कि प्रशासन को तुरंत कदम उठाते हुए मंडियों में पड़े गेहूं को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना चाहिए या उसे ढकने के लिए पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए।
मंडी में काम कर रहे मजदूरों और आढ़तियों का भी कहना है कि बारिश होने की स्थिति में कामकाज प्रभावित होगा और फसल को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाएगा।
किसानों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि गेहूं की उठान प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और मंडियों में तिरपाल या शेड की पर्याप्त व्यवस्था की जाए, ताकि फसल को बारिश से बचाया जा सके।
इस बीच, मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे किसानों की चिंता और गहरा गई है। किसान अब मौसम पर नजर बनाए हुए हैं और अपनी मेहनत की फसल को सुरक्षित रखने की उम्मीद कर रहे हैं।
वहीं, जिला मंडी अधिकारी गगनदीप सिंह ने भरोसा दिलाया है कि मंडियों में तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और किसी भी किसान की फसल खराब नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है और फिलहाल किसी प्रकार की बड़ी समस्या सामने नहीं आई है।