चंडीगढ़। हरियाणा श्रम विभाग में सामने आए करीब 1500 करोड़ रुपये के वर्क स्लिप घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के शेष नौ जिलों से भी जांच रिपोर्ट तलब कर ली है। सभी रिपोर्टें आने के बाद पूरे प्रकरण की विशेष जांच कराए जाने या उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस कथित घोटाले में श्रम मंत्री अनिल विज स्वयं व्हीसल ब्लोअर की भूमिका में सामने आए हैं। उन्होंने न केवल मुख्यमंत्री को जांच की मांग को लेकर पत्र लिखा, बल्कि 13 जिलों की विस्तृत जांच रिपोर्ट भी भेजी है। अनिल विज के निर्देश पर करीब चार महीने पहले जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।
जांच के दौरान करनाल, रेवाड़ी, नूंह (मेवात), महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर, पलवल, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पंचकूला, सिरसा और कैथल जिलों में कुल 5,99,758 वर्क स्लिप की जांच की गई। इनमें से मात्र 53,249 वर्क स्लिप वैध पाई गईं, जबकि 5,46,509 वर्क स्लिप अवैध निकलीं।
इसी तरह 2,21,517 श्रमिक पंजीकरणों की जांच में केवल 14,240 श्रमिक पात्र पाए गए, जबकि 1,93,756 पंजीकरण फर्जी साबित हुए। फिलहाल प्रदेश के नौ जिलों की रिपोर्ट अभी लंबित है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को शेष जिलों से भी रिपोर्ट शीघ्र भेजने के निर्देश दिए हैं।