Summer express/सोलन, भूपेन्द्र -:हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से लाई गई नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई इन ई-बसों को सोमवार को सोलन डिपो में ट्रालों से उतारने के दौरान तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ा। बसों के बार-बार बंद होने से परिवहन निगम और निर्माण कंपनी दोनों की तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार हैदराबाद की कंपनी द्वारा निर्मित करीब 50 नई इलेक्ट्रिक बसें रविवार को सब्जी मंडी सोलन पहुंची थीं। शुरुआत में डिपो में उचित रैंप की व्यवस्था न होने के कारण बसों को ट्रालों से नहीं उतारा जा सका। सोमवार को रैंप तैयार होने के बाद कंपनी के चालक बसों को नीचे उतारने पहुंचे, लेकिन इसी दौरान कई बसों में स्टार्ट और स्टॉप से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें सामने आने लगीं। कुछ बसें रैंप पर ही बंद हो गईं, जिससे अनलोडिंग प्रक्रिया बाधित हो गई।कंपनी की ओर से पहले दावा किया गया था कि बसों की सभी तकनीकी खामियां दूर कर दी गई हैं और वाहन पूरी तरह परिचालन के लिए तैयार हैं। हालांकि शुरुआती चरण में आई समस्याओं ने इन दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। फिलहाल कंपनी की तकनीकी टीम मौके पर मौजूद है और खराबियों की जांच कर रही है।बताया जा रहा है कि इन नई ई-बसों का ट्रायल सोलन से शिमला, कांगड़ा और हमीरपुर रूटों पर किया जाना है। राज्य सरकार और एचआरटीसी इस परियोजना को प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, लेकिन शुरुआती परेशानियों ने लोगों की उम्मीदों को कुछ हद तक निराश किया है।